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बंधन रिश्तों का

Sahdeo SinghSahdeo Singh November 16, 2022
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बंधन जो तोड़ दिया खून के रिश्तों का

खून के रिश्तों को ठुकरा दिया जिसने

अंजाम कभी सुखदाई कभी हो नहीं सकता

भरोसा किया गैरों पर वो कदम हुआ रुसवाई

आज युवा पीढ़ी जो प्यार के नाम पर

मर्यादाओं को भूल गया,

मां बाप के त्याग को अपमान का शूल दिया

चंद पल के जुनून को सपनों में सजाया

वो सपना ही बना जीवन का विष साया ।

जवां दिलों में धड़कता आधुनिकता का जलवा

तोड़कर हर बंधन बना लिया अलग कारवां

उसमें ही उलझकर जिंदगी के हंसी पल

टूटकर बिखर जाते हैं सपनों के शीशमहल ।।

सपनों के शीशमहल ।।

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