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हिन्दी पखवाड़ाPoetry1 min read

अपने घेरे में कैद जिन्दगी

Sahdeo SinghSahdeo Singh September 14, 2021
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मैं कैद हूँ अपने बनाये घेरे में,

लाख कोशिशें करने पर भी,

तोड़ना मुश्किल हो गया,

तडप रहा हूँ जंजीरों में,

जकडा हुआ,

इनको तोडकर निकलना

मुश्किल हो गया ,

जिन्दगी बंदिशों में सिकुड़ गयी

ऐसे जैसे पिंजरें में कैद पंछी,

अब भी आजाद होने का

जुनून है दिल में,हिम्मत बनाये

बैठे हैं ।

दौड़ सकता नहीं,चल सकता नहीं,

घिसट कर ही सही ! अपने घेरे को

तोड़ आजाद हो जाऊंगा,

फिर से गिरते, घिसटते ही सही

मंजिल तक पहुंच जाऊंगा ।

इसी आश और विश्वास में,

कट रही जिन्दगी,

एक दिन अपने बनाये घेरे को तोड़,

खुद को आजाद बना पाऊँगा ।।

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