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अनजाना जीवन सफर

Sahdeo SinghSahdeo Singh October 2, 2021
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दो कदम चलते चलते,

थके थके चुपके चुपके,

कहीं पल भर का विश्राम मिले,

मन हो जाये हलके हलके ।

ये अजनबी राहें हैं ना कोई ठिकाना है,

बस चलते जाना है

बस चलते जाना है ।

है दूर बहुत मंजिल,

अब पाँव हुए बोझिल,

ये अंजानी राहें,फैलाये खड़ी बाहें,

इन अन्धेरी राहों में मिल जाना है,

बस चलते जाना है,

बस चलते जाना है ।

ये जीवन सफर है,

इसमें ना कोई हमसफर,

सब अजनबी हैं ना कोई रहगुजर,

इन टेढे मेढे राहों पर,

लुढ़कते जाना है,

बस चलते जाना है ।

बस चलते जाना है ।।

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