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मुझे पागल कर रहा है।

Tuwar WritesTuwar Writes July 8, 2022
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तुम्हारी कोयल सी बोली का मधुर संगीत 
ओ मेरे मनमीत 
मुझे पागल कर रहा है।

तुम्हारी सांसों को गर्माहट का ये गर्म मौसम
चंदन की महक सा हवा में फैलता हुआ यौवन

मुझे पागल कर रहा है।

तुझ में सब और सब में तेरा ही दिखाई देना
हर वक्त हर पल बस तेरी यादों में रहना 

मुझे पागल कर रहा है।

तुम्हारी आंखों में प्रेम,हया,शर्म और लज्जा
तुम्हारे किरदार में बसा हुआ वो छोटा सा बच्चा 

मुझे पागल कर रहा है।

तुम्हारा गुस्सा, तुम्हारा शर्माना, तुम्हारा मुस्कुराना
बातो के बीच में वो बालो में उंगली का उलझाना

मुझे पागल कर रहा है।

मैं तुमसे,तुम्हें चुराकर,तुम में डूब जाना चाहता हूं
सच तो ये ही की मैं खुद ही पागल होना चाहता हूं

इसलिए मुझे ये सब कुछ पागल कर रहा है।

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