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'नेताजी' सोच रहे होंगे कैसी हमने दिलाई आजादी,
सारे नेता ठग हुए जनता की देती ना चिंता दिखाई।
अपने दौलत ,अपने रसूख ,अपने वोट की फ़िक्र रहती,
करते मेरे प्रतिमाओं का उपयोग, देते फूल-माला की चढ़ाई।
मेरे विचारों से मतलब नहीं, देश की चिंता नहीं ,
क्या इसलिए दिलाई हमने आजादी?
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