झूठा सम्मान's image
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हम ऐसा क्यूँ करते है?
माँ को बनाकर देवी, उससे 
इंसानों वाली खुशियाँ छीन लेते है
हम ऐसा क्यूँ करते है?

जो बाप खुद कुछ न कहे
उससे उसका दर्द क्यूँ नहीं पूछते है
बनाकर भगवान उसे, उसे ही छोड़ देते है
सच, हम ऐसा क्यूँ करते है?

बनाकर घर की इज्जत, एक पिंजड़े का 
लड़कियों को उसी में कैद कर देते है
और मर्द का मोहर लगाकर हम
लड़को को रोने भी नहीं देते है
सच, हम ऐसा क्यूँ करते है?

माँ भी इंसान है, पति की सेवा
बच्चों का ख्याल उसका धर्म है?
लेकिन खुद के लिए जीना,खुद
का ख्याल नहीं उसका कर्म है?

चलो माना परिवार की पोषण,देखरेख
एक पिता होने का दायित्व है
तो फिर वो खुद की खुशियों का ख्याल
क्यूँ न रखें,उसका खुद का भी तो एक व्यक्तित्व है!

जो जैसा है उसको वैसा ही क्यूँ नहीं रहने देते है
झूठे आडम्बर में उसका जीवन छीन लेते है
हम, हाँ हम ऐसा क्यूँ करते है?

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