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द्वन्द जीवन से

rupesh pandeyrupesh pandey October 19, 2021
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ये जीवन ही एक द्वन्द है तो 
कब तक इसको टाला जाएं

दुख के साथ सुख भी तो है इसमें
तो दुख को ही क्यूँ पाला जाएं

जीत में हार का, हार में जीत का
नाम ही है जीवन
तो क्यूँ न इसे संभाला जाएं

ये जीवन ही एक द्वन्द है
फिर कब तक इसको टाला जाएं

भय हटे अब इस तिमिर का
हर ओर बस उजाला जाएं

सबके पेट भरे जहाँ पर
जहाँ सबके मुख में निवाला जाएं

तो फिर ऐसा ही एक राम राज्य
फिर से क्यूँ ना खंगाला जाएं

ये जीवन ही एक द्वन्द है
फिर कब तक इसको टाला जाए

सुख दुख इस सिक्के के दो पहलु
तो हर बार इसे उछाला जाएं

फिर ये सुख दुख तो सब चलते रहेंगे
फिर दुख को ही क्यूँ पाला जाएं

ये जीवन ही एक द्वन्द है
फिर कब तक इसको टाला जाए







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