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कोई और मिल गयी है मुझे...

RupeshRupesh October 22, 2021
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कोई और मिल गयी है मुझे दिल लगाने के लिए,

तेरा जाना भी ज़रूरी था उसके आने के लिए. 


अब तो घर सजाने को नया सामान है काफी,

जगह बाकि नहीं है कुछ भी पुराने के लिए. 


सफर बाकि है खुद को यूँ समझा लिया मैंने,

ठहरा था कहीं रात बिताने के लिए. 


मुनासिब है कि संभलने का हुनर सीख लिया जाय,

बैठे हैं कई और गिराने के लिए. 


भँवरे को चमन में गुलों की क्या कमी आखिर,

कलियाँ और भी हैं इश्क़ लड़ाने के लिए.


तेरी दग़ा भी 'राज' पे एहसान कर गयी,

फ़साना जो मिल गया है सुनाने के लिए. 


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