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तुझसे मिलने के खातिर

Rupali YadavRupali Yadav April 21, 2022
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तुझसे मिलने के खातिर हम आस लगाए बैठे हैं,

जो बात जुबां  पर आनी थी उसे दिल में छुपाए बैठे हैं,

तेरे दिए ताबीज को हम मुट्ठी में दबाए बैठे हैं,

तुझसे मिलने के खातिर हम आस लगाए बैठे हैं।


तेरी यादों को संजोने के खातिर हम दुनिया को बिसराये बैठे हैं,

तेरे रुखसारों की लाली को होठों से लगाए बैठे हैं,

तुझसे मिलने के खातिर हम आस लगाए बैठे हैं।


बातों की गाड़ी पर अपनी,  हम ब्रेक लगाए बैठे हैं,

जिन सड़कों से तू गुजरा था उन पर घुटने टिकाए बैठे हैं,

तुझसे मिलने के खातिर हम आस लगाए बैठे हैं।


सच्चाई का इल्म भी है फिर भी उम्मीद सजाए बैठे हैं,

जिन राहों से तू निकला था उन पर नजर बिछाए बैठे हैं,

तुझसे मिलने के खातिर हम आस लगाए बैठे हैं।


दिल  के तहखाने में हम तुझे अपना बनाया बैठे हैं,

तुझसे मिलने की खातिर हम आस लगाए बैठे हैं।

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