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Poetry:भारत और भारतीय

ऋतुऋतु June 16, 2020
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•○भारत और भारतीय ○•



इन्साफ की क्या उम्मीद रखें,

कानून जहा बेबस है ।

झूठ की लिबास ओढ़े,

यहाँ सबको सच की तलाश है।


बदलाव की चाह सब में है ,

अफसोस ये है की कोई करता नहीं।

हमदर्दी जताने आते हैं लोग,

पुकार ने पर कोई हाथ बढाता नहीं।


कल में सननाटा था,

आज में प्रतिवाद हो ।

धर्म,सियासत से बडा देश

यह सब भारतीयों को आभास हो।


ऋतु


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