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ज़िंदगी दौड़ रही

Roopali TrehanRoopali Trehan September 12, 2022
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ज़िंदगी दौड़ रही

अपनी रफ़्तार से

आप काहे जल रहे

बिजली के तार से


मिलेगी न तसल्ली ऐसे

ख़ुद के ख़्वाब मार के

बैठ जाओगे जो तुम यूं ही

हकीकतों से हार के


रास आएगी न खुशियां यूं

पैसों की गड्डियां जमाने से

सुकून मिलेगा सिर्फ़ तुम्हें

ख़ुद के करीब आने से


थक जाओगे भाग भाग कर

वक्त बीत जायेगा

सोच के बैठा जिस कल की तू

वो कभी न आयेगा

सोच के बैठा जिस कल की तू

वो कभी न आयेगा

✍️✍️

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