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ये ज़िंदगी है साहिब

Roopali TrehanRoopali Trehan November 30, 2021
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थका देती हैं शिकायतें कभी

तो कभी बिन बात के आँखें नम होती हैं

ये ज़िंदगी है साहिब......

यहाँ दिखने वाली हर चीज़ महज़ भ्रम होती है


काटती है खामोशियाँ कभी

तो कभी लफ़्ज़ों से चुभन होती है

ये ज़िंदगी है साहिब.....

यहाँ हर हाल में महसूस उलझन होती है


करती हैं शोर तन्हाईयाँ कभी

तो कभी महफिलों में घुटन होती हैं

ये ज़िंदगी है साहिब...

ये किसी की कहाँ आसानी से बसर होती है

ये किसी की कहाँ आसानी से बसर होती है

✍️✍️

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