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यादों की गुल्लक

Roopali TrehanRoopali Trehan December 7, 2021
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कल जो बैठी तोड़

यादों की गुल्लक तो

कुछ सपने आज़ाद हुए

क़ैद थे जो बरसों से भीतर

वो सारे पल आबाद हुए


उठाया जो इक टुकड़ा

बीती हुई कहानी का

याद आ गया बचपन

और वो किस्सा नादानी का


बैठी जो कुछ देर

उन यादों के ढेर में

पहुंच गई अतीत में

यूं ही खेल खेल में


मुलाक़ात हुई जो ख़ुद से

तो जाना ये नज़दीक से

बीत जाते हैं पल यूं ही

और हम रह जाते हैं उम्मीद पे

✍️✍️

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