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किसको क्या चाहिए

किसकी क्या ज़रूरत

जानती सबकुछ

जैसे जादू की छड़ी


दो हाथों से

काम सौ करती

ऐसी उसकी

काया है ढली


बैठ जाए जो

इक पल को भी

रुक जाती

पूरे घर की घड़ी


काम न उस बिन

चले किसी का

ऐसी उसकी

शख्सियत गड़ी


पगार है उसकी

छोटी सादी

दो आने परवाह

और प्यार की झड़ी

✍️✍️

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