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सीले सीले ख़्वाब

Roopali TrehanRoopali Trehan January 21, 2022
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ये जो सीले सीले

से ख़्वाब हैं

अंधेरों को रौशन

करते आफ़ताब हैं


उतार चढ़ाव करते

जज़्बातों के बीच

सवालों से झाँकते

कुछ जवाब हैं


चकाचौंध से

भरी दुनिया में

खलबली मचाते

फिरते कुछ हिजाब हैं


हक़ीक़त ए ज़िंदगी

है उलझी बहुत

उसपर अंगड़ाईयाँ

भरता दिल-ए-बेताब है

✍️✍️

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