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रिश्तों का कारोबार

Roopali TrehanRoopali Trehan February 18, 2022
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कुछ इस तरह से चल रहा

अब रिश्तों का कारोबार

जिसकी जितनी शोहरत

उसपर उतना गौर


जज़्बातों का ठिकाना नहीं

तानों का तरकश है भारी

ख़ुद को उठाने की खातिर

औरों को गिराने की 

कोशिशें हैं ज़ारी


आसक्ति का बोध नहीं

नज़दीकियों के क़दम हैं भटके

बेवजह की तवज्जो पाने को

जहालत के गर्त में हैं जा अटके

✍️✍️

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