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पिंजरे का शेर

Roopali TrehanRoopali Trehan August 21, 2022
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हाल देखकर इंसानों का

शेर पिंजरे में इतराता है

आज़ाद होते हुए भी

आदम क़ैदी नज़र आता है


हूं मैं मज़बूर ये तो

समझ आता है

हुआ क्या है इसको

जो ख़ुद की ही बंदिशों में

जकड़ा चला जाता है


देखने में स्वतंत्र

मगर हरपल रिहाई

की गुहार लगाता है

सही मायने में "पिंजरा "

इंसानों को ही भाता है

सही मायने में "पिंजरा "

इंसानों को ही भाता है

✍️✍️

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