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मुस्कुराहटें मज़बूर हैं

Roopali TrehanRoopali Trehan March 29, 2022
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समझे जो समझे

वरना बातें

फ़िजूल हैं

दिखावों के दौर में

सादगी महज़ फ़ितूर है


बहले तो बहले

वरना रौनकें

बेनूर है

दर्द की चुभन के आगे

मुस्कुराहटें मज़बूर हैं


संभले तो संभले

वरना दिलासे

फिज़ूल हैं

बिखरे को जो समेट न सके

ऐसे रिश्ते नासूर हैं

✍️✍️

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