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मन की परवाज़

Roopali TrehanRoopali Trehan April 22, 2022
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जाने न सीमाएं कोई

न जाने पाबंदियाँ

मन की बस मन ही जाने

इसकी अपनी ही रज़ामंदियाँ


रोके न रूके किसी से

इसकी अपनी ही रफ़्तार है

माने ना आदेश किसी का

मन की अपनी ही सरकार है


बाँधे न बाँध सके कोई

ऐसा परिंदा आज़ाद है

क़ैदी हैं सब इसके

मन की अपनी ही परवाज़ है

मन की अपनी ही परवाज़ है

✍️✍️

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