मन के मोड़'s image
Share0 Bookmarks 17 Reads2 Likes

मोड़ सारे मन के थे

फ़ैसला तक़दीर के 

हाथों आ गया

वो उड़ता ख्याल था

जहन में जाकर समा गया


बढ़ी ज्यों ज्यों ज़िंदगी

तलब का सिलसिला

बढ़ता गया 

यथार्थ के दायरों में 

ख्वाबों का साया

सिमटता गया


कोशिशें तम्मानाओं

को पाने की हरपल

दिल में पनपती रहीं

मगर हकीकतों की 

दुनिया को सपनों 

की रंगीनियाँ हरदम

खटकती रही

✍️✍️

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts