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मन के अंदर

मन के भीतर

मन की तहों 

में छुपा हूं मैं

तन के ऊपर 

तन की सतह पर

कब और 

किसको दिखा हूं मैं


मन ही मन में

हरदम हरपल

भीतर भीतर 

पला हूं मैं

चेहरे के ऊपर 

आंखों के पीछे

कब और 

किसको दिखा हूं मैं


मैं हूं सम्पूर्ण सार तुम्हारा 

अंदर तेरे छुप बैठा हूं मैं

ढूंढ सको तो ढूंढो ख़ुद को

हर मर्ज़ की दवा हूं मैं

हर मर्ज़ की दवा हूं मैं

✍️✍️

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