माँ's image
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बैठ जाऊं जो हारकर कभी

तो हरपल मुझे उठाती है

चलते रहना ही है

नाम ज़िंदगी का

ये मेरी माँ की आवाज़ सिखाती है


छोड़ दूं जो उम्मीदें सारी

तो हरदम साहस बंधवाती है

हौसलें ही हैं रफ़्तार ज़िंदगी की

ये मेरी माँ की प्रतिध्वनि सिखाती है


टूट जाए जो बांध सब्र का

तो नित्यप्रति दृढ़ता जगाती है

ख़ुद के हारे हार है

ख़ुद के जीते जीत

ये मेरी माँ की

सीखें मुझे सिखाती है

✍️✍️

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