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लुभावना बचपन

Roopali TrehanRoopali Trehan November 1, 2021
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बचपन की यादें 

वो बेशकीमती सौगातें

जब होते थे बेफ़िक्री भरे दिन

और सुकून भरी रातें


ना थे ज़िंदगी में कोई झमेले

और ना ही था कोई गम

सुबह ओ शाम गूंजता था

बस मुस्कुराहटों का सरगम


खिलखिलाती थी आँखें

और चहकता था मन

काश फ़िर लौट आए

वही लुभावना बचपन

✍️✍️

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