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क्यों बदलूं ख़ुद को

Roopali TrehanRoopali Trehan September 21, 2022
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क्यों बदलूं मैं ख़ुद को

जैसी हूं कमाल हूं

फरिश्ता तो नहीं

हां मगर,

शख़्सियत बेमिसाल हूं


ऋतु दुखों की नहीं

मौसम खुशगवार हूं

ज़िंदगी की डगमगाती नैया

थामे रखती दृढ़ पतवार हूं


निराशाओं की तिमिर नहीं

उम्मीदों की नूर हूं

बैचेनियों का सबब नहीं

सुकून का दस्तूर हूं

बैचेनियों का सबब नहीं

सुकून का दस्तूर हूं

✍️✍️

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