किसी रोज़'s image
Share0 Bookmarks 30 Reads1 Likes

मिले जो वक्त किसी रोज़ तुम्हें

तो आ जाना तुम पास मेरे

तमाम उलझनों को छोड़कर

सहेज रखें हैं मैंने एहसास कई

दिल में एक अरसे से जोड़कर


उठे जो तलब किसी रोज़ तुमको

तो आ जाना तुम पास मेरे

सारे रिवाज़ों को तोड़कर

सहेज रखें हैं मैंने जज़्बात कई

दिल में कबसे संजोकर


क़दम जो उठें किसी रोज़ तेरे

तो आ जाना तुम पास मेरे

झिझक का पिंजरा खोलकर

बतानी हैं तुमको बातें बहुत सी

रखी है जो मैंने कबसे

दिल में संभालकर

✍️✍️

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts