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ख़ुद की मानिए

Roopali TrehanRoopali Trehan September 5, 2022
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समझने समझाने के फेर में

वक्त मत गुजारिए

औरों को छोड़ पीछे

कभी ख़ुद को भी पुकारिए


बह जाएगा रेत सा

जितना भी कसके थामिए

औरों को कर अनसुना

कभी ख़ुद की भी मानिए


शिकवे शिकायतें मलाल

सबकुछ कल पर टालिए

बीत गया जो अतीत था

आज की शक्ल सँवारिए

आज की शक्ल सँवारिए

✍️✍️

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