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ख़ुद ही खुद का सहारा

Roopali TrehanRoopali Trehan October 6, 2021
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भागते थे जो कभी 

बचपन में अंधेरों से डर कर

उनको आज विरानियों 

में ही सुकून रास आता है

मिलता था जो लुत्फ़

कभी रौशन महफिलों में

अब वो तन्हाइयों में पास आता है


बेचैन कर देता था 

जिन्हें अकेलापन कभी

आज उनके दिल को

एकांतवास भाता है

मिलता था जो कभी 

हर समस्या का समाधान 

अपनों के पास

आज वो ख़ुद के 

पास नज़र आता है


बदल गया है वक्त अब

और बदल गई है

सबकी विचारधारा

मिलता था साथ 

कभी अपनों का मगर

अब तो रह गया है बस

ख़ुद ही ख़ुद का सहारा

✍️✍️

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