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कैसा भी हो दौर

Roopali TrehanRoopali Trehan January 30, 2022
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कैसा भी हो दौर मगर 

गुज़र ही जाता है

रुक रुक कर ही सही 

सफ़र ज़िन्दगी का मगर

कट ही जाता है


कैसा भी हो वक्त मगर

कट ही जाता है

गिर गिर कर ही सही

इंसान अंत में मगर 

संभल ही जाता है


कैसा भी हो मंज़र मगर

बदल ही जाता है

दुःखों का अंधेरा हो

चाहे जितना भी घना

मगर छट ही जाता है

मगर छट ही जाता है

✍️✍️

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