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कभी बनते हैं कभी बिगड़ते हैं

Roopali TrehanRoopali Trehan October 5, 2021
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कभी बनते हैं

तो कभी बिगड़ते हैं

ना जाने कैसे सपने हैं

जो रेत से फिसलते हैं


कभी अपनाते हैं

तो कभी ठुकराते हैं

ना जाने कैसे ख़्वाब हैं

जो हर रोज़ आज़माते हैं


कभी उगते हैं

तो कभी मुरझा जाते हैं

ना जाने कैसे स्वप्न हैं

जो खिल कर कुम्हला जाते हैं

✍️✍️

 कुम्हला(मुरझा/सूख जाना)

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