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होंठों की हँसी

Roopali TrehanRoopali Trehan September 27, 2022
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होंठों की हँसी तो 

महज़ नक़ाब है

आँखों में छुपे 

सारे जवाब है


हकीकतें कब होती 

पाक बेदाग हैं

हसरतों का अपना 

अलग ही रुआब है


दिल में उठता 

ये कैसा अजाब है

रास्ता रोके खड़ी ख्वाहिशें 

समझौतों के खिलाफ़ हैं


ज़िंदगी का अपना कुछ

अलग ही हिसाब हैं

सिक्के मुस्कुराहटों के कम 

नोटों की गड्डी

बराबर विषाद है

✍️✍️

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