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हाथों से बुने रिश्ते

Roopali TrehanRoopali Trehan December 6, 2021
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रिश्तों को हाथों से बुनने का

अब ज़माना ना रहा

कोट और जैकेट की भीड़ में

ऊन से बुनी गर्माहट का

अब ठिकाना ना रहा


बुनता नहीं कोई

अब प्रेम और स्नेह को

उंगलियों में लपेट कर

रहते हैं लोग अब

ख़ुद को चमड़े और

नायलॉन में समेट कर


सिलाईयां आज भी

हाथों के स्पर्श को तरसती हैं

यादें उस बीते हुए ज़माने की

आज भी आँखों में बस्ती हैं

✍️✍️

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