हम किधर गए's image
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इंसान बढ़ रहे इंसानियत खो गई

चालाकियों से हारकर मासूमियत सो गई


चीख उठी निगाहें लफ़्ज़ जम गए

आवाज़ों के बाज़ार में क़दम थम गए


नक़ाबों की नुमाइश में जज़्बात बिखर गए

आजमाइशों की जंग में एहसास सिहर गए


सजी रही मुस्कान मगर दिल भर गए

समझौतों के फेर में न जाने हम किधर गए

समझौतों के फेर में न जाने हम किधर गए

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