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गुज़रा ज़माना

Roopali TrehanRoopali Trehan August 23, 2022
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छूट गए वो पल जब

चित्रहार संग होता था

गीतों की धुन से रौशन

हर इतवार होता था


गुज़र गया वो ज़माना 

जब किसी के आने का 

इंतज़ार होता था

मेहमाननवाज़ी का 

हर दिल तलबगार होता था


बीत गया वो वक्त जब

दूरियों में भी साथ होता था

दर्द एक को होता था 

मगर हर कोई रोता था


आज के समय में

मेल मिलाप कहां 

किसको भाता है

अपनेपन की चाहतें

अब कहां कोई जताता है

अपनेपन की चाहतें

अब कहां कोई जताता है

✍️✍️

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