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गुनगुनाती है सुबह

Roopali TrehanRoopali Trehan December 2, 2021
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गुनगुनाती है सुबह 

और शामें भी गज़लें गाती हैं

जिस दिन उनसे 

मुलाक़ात हो जाती है


मिट जाता है दर्द सारा और 

उदासियाँ भी मुस्कुराती हैं

कानों में जब 

उनके अल्फाजों की 

सरगम गीत गाती है


थिरक उठती हैं सांसें और

धड़कने भी इठलाती हैं

उनकी मौजूदगी हर 

मौसम को कुछ इस क़दर 

खुशनुमा कर जाती है

✍️✍️

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