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दीवार पर टंगी मगर

सरपट है दौड़ती

सुईयों के दम पर

हरदम है बोलती


विशाल है इतनी

मुट्ठी में न आए ये

भागना है कैसे

हरपल समझाए ये


रोके न रुके ये

चलता न इसपर ज़ोर है

सुने ये न किसी की

ऐसी ये कठोर है


है ये न शिकारी कोई

मगर हमसब इसके शिकार हैं

क़ैद में हरपल रखे अपनी

ऐसी ये कारागार है


इसका न कोई दोस्त यार

न ही कोई संबंधी है

ये है ऐसी ताकतवर

हमसब इसके बंधी हैं

है ये ऐसी ताकतवर

हमसब इसके बंधी हैं!!!

✍️✍️

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