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दुनियासाज़ी का खेल

Roopali TrehanRoopali Trehan September 1, 2021
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दुनियासाज़ी का खेल 

खेलना हमें कभी आया नहीं

गिर गया जो इक दफा नज़रों से 

वो दिल को फिर कभी भाया नहीं


सफ़र करती रही तमाम ख्वाहिशें उम्र भर

हकीकतों को ठुकराना कभी हमें आया नहीं

ढलती रही ज़िंदगी उस एक दिन के इंतज़ार में

मुक़द्दर का खेल कभी समझ में आया नहीं


मायूसियों की घनी धूप में 

आशाओं का साया कभी छाया नहीं

कोशिशें तमाम की दिल को बहलाने की 

मगर चैन ओ सुकून हमें कभी नज़र आया नहीं

मगर चैन ओ सुकून हमें कभी नज़र आया नहीं

✍️✍️

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