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दिल सिकुड़ रहें हैं

Roopali TrehanRoopali Trehan January 31, 2022
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बढ़ रहें हैं शहर

दिल सिकुड़ रहें हैं

तरक्की की दौड़ में

ईमान फिसल रहें हैं


जीत की होड़ में

अपने अपनों से

बिछड़ रहें हैं

दिखावों के दौर में

लोग वादों

से मुकर रहें हैं


कमाने की चाह में

हरपल दूर हो रहें हैं

कमज़ोर होते रिश्ते

मगरुर फिर रहें हैं

✍️✍️

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