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दिल अब तरसता है

Roopali TrehanRoopali Trehan August 22, 2022
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चूल्हे की सौंधी महक को

दिल अब तरसता है

मौसम भी अब बेवजह

कहां कब बरसता है


पेड़ों की छांव अब

कहां रास आती है

नजदीकियों में भी अब

रूहें कहां पास आती हैं


बारिश की बौछारें दिल को

कहां अब भिगोती हैं

दिखावों के शोर में

सादगी कहां अब लुभाती है


मोबाइल के दौर में

बातें घंटों कहां होती हैं

शिकायतों की भीड़ में

भावनाएं तन्हा बैठ रोती हैं

भावनाएं तन्हा बैठ रोती हैं

✍️✍️

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