दर्द का बाज़ार's image
Poetry1 min read

दर्द का बाज़ार

Roopali TrehanRoopali Trehan July 30, 2022
Share0 Bookmarks 11 Reads0 Likes

दर्द के बाजारों में 

रौनकें आबाद हैं

मुस्कुराहटों पर डेरा लगाए 

गहरा अवसाद है


आंखों में इंतज़ार 

लबों पर सवालात है

चाहतों का रास्ता रोके 

खड़े हालात हैं 


जहन के समुंदर में 

उफनाते जज़्बात हैं

डगमगाती कश्ती हसरतों की 

उसपर हकीकतें तैनात है

उसपर हकीकतें तैनात है

✍️✍️

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts