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चार दिन की मोहलत

Roopali TrehanRoopali Trehan September 17, 2022
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है मोहलत चार दिन की

सौ काम भी करने हैं

बिखेरनी हैं मुस्कुराहटें

दर्द सरेआम भी करने हैं


निभानी हैं रस्में कईं

दिल के अरमान भी पूरे करने है

नाराज़ बैठे चंद अपनों के

फ़रमान भी पूरे करने है


रह गए जो अधूरे

वो काम भी करने हैं

हकीकतों के खाली हाथ

हसरतों से भरने हैं


खामोशियों के खुले मुंह

लफ़्ज़ों से ढकने हैं

मनपसंद एहसासों के

ज़ायकें भी तो चखने हैं


है मोहलत चार दिन की

सौ काम भी करने हैं!!

✍️✍️

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