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दिखावे के रिश्तों में

सच का भ्रम बिकता है

संदेह का आवरण जो फैला सके

आज के दौर में केवल

वो रावण टिकता है

भूतकाल की बातों का जीवन

वर्तमान में उलझा दिखता है

हकीकतों को आंख से ओझल कर

कोहरे सा नादान भ्रम बिकता है

जो क्षणिक सुख देकर

मोह लेता है हृदय को हर बार

और भटका देता है

ज़िन्दगी की हर चाल....

✍️✍️

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