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बस चले जा रहे हैं

Roopali TrehanRoopali Trehan December 16, 2021
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दूर तक ओझिल हैं मंज़िले

बस चले जा रहें हैं

हम ना जाने खुद को क्यों

क़दम दर क़दम छले जा रहे हैं


झूठे दिलासों की ओर

मन का रुख किए जा रहें हैं

उम्मीदों के ढलते सूरज के संग

थोड़ा थोड़ा हर रोज़ ढले जा रहें हैं


गुमराह हो चुकी हैं कब की

हसरतें तमाम, मगर फिर भी

हौसलों के पर लगाए

उड़े जा रहें हैं

दूर तक ओझिल है

चैन ओ सुकून मगर फिर भी

ना जाने क्यों बेचैनियों की

राहों पर निरंतर बढ़े जा रहें हैं

✍️✍️

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