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बंजारा सी ख्वाहिशें

Roopali TrehanRoopali Trehan February 25, 2022
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बंजारा सी ख्वाहिशें 

सुकून की चाह में

नित्य भटकी फिरती हैं

चाहतें रख दिल में तमाम

उखड़ी उखड़ी दिखती हैं


मिलती है दस्तक जो

चैन ओ करार की

झट से चहक उठती हैं

हकीकतों को कर किनारे

दायरों से खिसकती हैं


मजबूरियों में फँसी ज़िंदगी से 

गुजारिश करती फिरती हैं

यथार्थ में उलझी हुई सी

नित्य नए ख़्वाब बुनती रहती हैं


बंजारा सी ख्वाहिशें ......

✍️✍️

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