अपना होने का दावा's image
Poetry1 min read

अपना होने का दावा

Roopali TrehanRoopali Trehan March 4, 2022
Share0 Bookmarks 20 Reads0 Likes

कुरेदते हैं ज़ख्म

लोग बनके अज़ीज़

सहलाने की अब

कहाँ रही वो तमीज़


रख कर हाथ काँधे पर 

करते हैं दोस्ती का दिखावा

खंजर पीठ में भोंकने का

कहाँ किसी को पछतावा


दिल में ज़हर और

ज़ुबान से लफ़्ज़ों

का करते हैं छलावा

दुखा कर दिल बात 

बात पर,करते हैं लोग 

अपना होने का दावा

✍️✍️

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts