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अंदर से सब अकेले हैं

Roopali TrehanRoopali Trehan October 10, 2021
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दुनिया की इस भीड़

के बड़े अजब ही खेले हैं

दिखते तो हैं चारों तरफ़ मैले 

मगर अंदर से सब अकेले हैं


खुदगर्जियों की राह पर

स्वार्थपरता के रैले हैं

रिश्तों ने मुंह पर ओढ़े

मतलबों के अंधेरे हैं


सहारों के नाम पर 

लग जाते लबों पर

चुप्पियों के पहरे हैं

ज़रूरतों के हिसाब से

बदलने वाले यहाँ बहुतेरे हैं

✍️✍️

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