पुरानी किताब's image
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धूल खा रही इश्क़ की किताब के पन्नों को उठा कर देखा तो मालूम हुआ अभी जिंदा है मेरे हृदय में प्रेम का पौधा। 

पौधा जो फिरसे पेड़ बन सकता है। मैंने खंगाले उस किताब के कई और पन्ने तो मालूम हुआ अभी और बाकी है मेरे हिस्से का प्रेम जो मुझे मिलना चाहिये। शायद मिलेगा। और में इसी उम्मीद में जिंदा हूँ कि लिखते-लिखते किसी दिन पहुँच जाऊँ किताब के आख़िरी पन्ने तक और उस पन्ने को खाली छोड़ कर सफ़र अपना पूरा कर लूँ...



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