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कामरेड अमराराम

Rohit MeenaRohit Meena September 29, 2021
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आज फिर एक आंदोलनजीवी से परिचय करवाता हूं, ये शख्स भी राजस्थान में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं ये हैं कॉमरेड अमाराराम जी, संघर्षों के महान योद्धा किसानों के मसीहा कामरेड अमराराम जी ने ऐसे ऐसे संघर्ष किए कि किसी ने न तो किये है और आगे भी मुझे नही लगता कि कोई कर पाएगा। 1993 में विधानसभा उपचुनाव में राजस्थान के गृहमंत्री और कदावर नेता रामदेवसिंह महरिया को हराकर S.K. कॉलेज का एक नोजवान मुंडवाड़ा सरपंच कॉमरेड अमराराम जी विधानसभा मे जब जाते है तो उनका नम्बर विधानसभा में नए सदस्य होने के कारण पीछे ही पीछे की तरफ आता । विधानसभा शुरू होते ही कॉमरेड अमराराम जी किसानों की बिजली को लेकर हंगामेदार आवाज उठाता हैं और जब बात को किसी ने सुना नही तो पीछे से एक कुर्सी दनदनाती हुई सभी सदस्यों के ऊपर से आती है और तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरूसिंह जी के सामने आकर गिरती है और तत्कालीन राज्यपाल बलीराम भगत के अंगुठे का फेक्चर होता है पूरा सदन सदमें मे आ जाता है नोजवान विधायक को 6 माह के लिए विधानसभा से निकाल दिया जाता है परंतु उस घटना के बाद पूरी सरकार इस नोजवान विधायक से कांपने लगती है और उसके बाद खुशियों को बांधा जाने लगा। ऐसे थे विधायक अमराराम, किसी और ने ऐसा किया हो तो बताना ।


ये राजस्थान विधानसभा में लगातार चार बार 1993 - 2013 तक धोद और दांतारामगढ़ विधानसभा से विधायक रहें हैं और ''किसान सभा'' के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं ये पिछले 9 महीने से किसान आंदोलन खेड़ा शाजापुर बॉर्डर पर मजबूती से डेट हुए है तथा पूरे राजस्थान में किसानों को जगाने का काम लगातार बिना रुके बिना थके हुए कर रहे है।


इनका सादगी से भरा व्यक्तित्व और ओजस्वी भाषण जो लगातार किसानों में जोश भरने का काम करता हैं, इनके बुलंद हौसले को दिल से सलाम करता हूं ! ये हमेशा कहते हैं "मोदी हारेगा और किसान जीतेगा" ।



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