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किताबों का बोझ

Nek Dil BandaNek Dil Banda December 24, 2021
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"स्कूल के दिन"
वो भी क्या दिन थे:-
जब हम स्कूल जाया करते थे ,
सुबह देर से उठते:- पिता के हाथों पिटते
और माँ की डाट खाया करते थे ,
अब कहाँ वो दिन:- बस हर रोज मौज है
ख्वाहिशें बहुत कम
उससे कहीं ज्यादा किताबों का बोझ है ,,
          ~ रोहित के.डी.

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