(ग़ज़ल) लौटकर के अगर आप आते नहीं's image
1 min read

(ग़ज़ल) लौटकर के अगर आप आते नहीं

RiteshMGuptaRiteshMGupta June 16, 2020
Share0 Bookmarks 48 Reads1 Likes


लौटकर के अगर आप आते नहीं

इस कदर हम कभी मुस्कुराते नहीं


शाइरी भी मुकम्मल न होती कभी

उस घड़ी आप ही गर रुलाते नहीं


हौसला टूटने का न होता अगर

रेत पे घर कभी हम बनाते नहीं


आप दिल में मिरे सिर्फ़ रहते न तो

आपको हर सुबह गुनगुनाते नहीं


याद करते नहीं गर हमीं आपको

रोज़ चौखट पे दीया जलाते नहीं


- ऋतेश गुप्ता


वज़्न :- 212 212 212 212

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts