अश्रु कथा's image
Share0 Bookmarks 27 Reads0 Likes

अश्क बहने लगे , दिल से कहने लगे, 

क्या जरूरत थी खुद को लगाया कहीं, 

माना के सच है टुकड़े तेरे हुए, 

मगर इसकी सजा हमने भी पाई, 

जिन आँखों में हम बरसो से थे, 

आज उनसे ही हमारी विदाई हुई। 

लेखक- रितेश गोयल 'बेसुध'

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts